Dua

Daily Dua — Sep 01

S Sehri.bd September 1, 2026 1 min read १४३ व्यूज
وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا يَزَالُ الْبَلَاءُ بِالْمُؤْمِنِ أَوِ الْمُؤْمِنَةِ فِي نَفْسِهِ وَمَالِهِ وَوَلَدِهِ حَتَّى يَلْقَى اللَّهَ تَعَالَى وَمَا عَلَيْهِ مِنْ خَطِيئَةٍ» . رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ وَرَوَى مَالِكٌ نَحْوَهُ وَقَالَ التِّرْمِذِيُّ: هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيح

अबू हुरैरा के अधिकार पर, भगवान उस पर प्रसन्न हो सकते हैं, उन्होंने कहा: भगवान के दूत, भगवान की प्रार्थना और शांति उस पर हो, ने कहा: "आस्तिक पुरुष या महिला पर दुःख कभी नहीं रुकेगा। वह स्वयं, उसकी संपत्ति, और उसके बच्चे जब तक वह सर्वशक्तिमान ईश्वर से नहीं मिल जाता, तब तक वह किसी भी पाप से मुक्त नहीं हो जाता।" इसे अल-तिर्मिज़ी ने सुनाया था, और मलिक ने भी कुछ ऐसा ही सुनाया था, और उन्होंने कहा अल-तिर्मिधि: यह एक हसन और प्रामाणिक हदीस है।

— Mishkat al-Masabih #1567 (Sahih)

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