وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «الْمُكَاتَبُ عَبْدٌ مَا بَقِيَ عَلَيْهِ مِنْ مُكَاتبَته دِرْهَم» . رَوَاهُ أَبُو دَاوُد
अम्र बिन शुएब के अधिकार पर, उनके पिता के अधिकार पर, उनके दादा के अधिकार पर, पैगंबर के अधिकार पर, भगवान की प्रार्थना और शांति उन पर हो, जिन्होंने कहा: "जो लिखता है वह एक गुलाम है। उसके पास लिखने से एक भी दिरहम शेष नहीं है।" . अबू दाऊद द्वारा वर्णित
— Mishkat al-Masabih #3399 (Sahih)