Dua

Daily Dua — Jul 29

S Sehri.bd July 29, 2026 1 min read २१३ व्यूज
وَعَنْ جَابِرٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ الْمُنْتِنَةِ فَلَا يَقْرَبَنَّ مَسْجِدَنَا فَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ تَتَأَذَّى مِمَّا يَتَأَذَّى مِنْهُ الْإِنْسُ»

अबू हुरैरा ने कहा कि ईश्वर के दूत रमज़ान में रात में प्रार्थना की सराहना करते थे, लेकिन इसे कर्तव्य के रूप में आदेश नहीं देते थे। वह कहते थे, "यदि कोई विश्वास के कारण और ईश्वर से अपना इनाम मांगने के लिए रमज़ान में रात के दौरान प्रार्थना करता है, तो उसके पिछले पाप माफ कर दिए जाएंगे।" जब ईश्वर के दूत की मृत्यु हुई तो यही प्रथा थी, और यह अबू बक्र के खिलाफत और उमर के शुरुआती दौर में भी जारी रही। मुस्लिम ने इसे प्रसारित किया।

Abu Hurairah (RA) — Mishkat al-Masabih #707 (Sahih)

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